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हरिद्वार की जनता ने बचायी धर्मनगरी की अस्मिता

      हरिद्वार। एक माह से चल रही स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया का आज चुनाव परिणामों की घोषणा के साथ समापन भले ही हो गया हो लेकिन इन चुनाव परिणामों ने भविष्य की जो पटकथा लिखी है उससे स्पष्ट हो गया है कि जब किसी व्यक्ति के अत्याचार चरम पर पहुंच जाते हैं तभी उसका पतन होता है। राजा हो या राजनेता जनता जब उसको सम्मान देकर सिंहासन पर बैठाती है तो उसकी हठधर्मी और तानाशाही देखकर उसे सत्ता से बेदखल भी कर देती है। अतीत गवाह है कि इस देश की जनता ने गुलाम रहते हुए भी अत्याचार नहीं सहे, फिलहाल जिस नेता को अपने विधानसभा में विजयी रहने का अभिमान हो गया था उसका घमंड चूर-चूर हो गया और इस चुनाव ने ऐसी इबारत लिख दी है कि इस धर्मनगरी में अब न तो उस घमंडी का सिर कभी ऊंचा होगा और न ही उसकी पार्टी का जिसने सत्ता में आने के बाद जनता के ऊपर अत्याचारों के अलावा राहत देने का कोई काम किया ही नहीं। इस चुनाव में वही बदलाव की बयार में इतना वेग है कि यह बयार आगे लोकसभा के चुनावों से होती हुई विधानसभा चुनावों तक यथावत रहेगी।
इस चुनाव ने जिस पार्टी के सिर पर जीत का सेहरा बंधा है वह उस पार्टी की जीत नहीं बल्कि सत्तारुढ़ पार्टी की विफलता एवं अहंकार का विकल्प है। देवभूमि की जनता ने जो विकल्प चुना है उसे अति उत्साह में नहीं आना चाहिए बल्कि जिस प्रकार सत्ताच्युत होने के बाद उस पार्टी ने जनता से दूरी बनायी थी भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए। 2014 में भाजपा जब लोकसभा चुनावों में प्रचण्ड बहुमत के आधार पर सत्ता में आयी थी तो उस समय उसकी कोई उपलब्धियां नहीं थी केवल कांग्रेस की बुराई और जनता से झूठे वादों के आधार पर आयी थी लेकिन साढ़े चार साल बीतने के बाद भी उसके पास अन्य दलों की बुराई के अलावा अपनी कोई उपलब्धि नहीं है इसीलिए जनता ने अब फेकू पार्टी को नकारना प्रारम्भ कर दिया है।
जनता का गुस्सा कांग्रेस के प्रति आज भी कम नहीं है लेकिन दूसरी पार्टी ने इतना ठग लिया कि जनता अब उसे फूटी आंख से भी देखना नहीं चाहती। जनता जितना भाजपा से नाराज है उतना ही कांग्रेस से भी नाराज है। यदि कांग्रेस उस समय चाहती तो देश और देश की जनता की उन्नति के पांच साल बेकार नहीं होते। इन पांच वर्षों में देश इतना लुट गया है कि इसकी भरपाई आगामी 15-20 वर्षों में हो पायेगी। जब फेकूराम बोल रहे थे कि अच्छे दिन आने वाले हैं तो कांग्रेस को बताना चाहिए था कि ये अच्छे दिन जनता के नहीं कहने वाले के ही आयेंगे। जब फेकूराम और एक संत यह कहकर देश की जनता को गुमराह कर रहे थे कि विदेशों में जमा कालाधन भारत में आने पर सभी के खातों में 15-15 लाख रुपये जमा हो जायंेगे तो कांग्रेस को बताना चाहिए था कि ऐसा नहीं हो सकता। नोटबंदी से देश तबाह हो गया पीएम ने जब जनता से पचास दिन मांगे तो कांग्रेस ने भी दे दिए और कुछ नहीं बोली, जीएसटी पर भी मौन, डीजल पेट्रोल गैस के दाम बढ़ने पर भी कांग्रेस मौन लेकिन जनता भी क्या करे उसके पास कोई विकल्प नहीं है। हरिद्वार की जनता ने नगर निगम में आदर्श बोर्ड की स्थापना करने के उद्देश्य से मेयर पद पर कांग्रेस को विजयी बनाया जबकि पार्षद भाजपा के अधिक हैं।
जहां तक इस देवभूमि में स्थानीय निकाय चुनाव के परिणामों का सवाल है तो हरिद्वार के उस अहंकारी नेता को अब समझ लेना चाहिए कि मुगलों का शासन किस कारण गया था और देश गुलाम हो गया। यह नेता भी उसी रास्ते पर चल पड़ा उसने ऐसे ‘चरित्रमान’ प्रत्याशी को मेयर पद पर उतार दिया कि धर्मनगरी की पूरी जनता थू-थू करने लगी परिणाम यह होगा कि गधा भी गया और रस्सी भी ले गया। इस अहंकारी की हठधर्मी का परिणाम है कि आज कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी अनीता शर्मा भारी उठा-पटक के बाद भी सम्मानजनक मतों से विजयी रहीं जबकि पार्षद भाजपा के अधिक विजयी हुए। हरिद्वार की जनता ने विजयी प्रत्याशी को उसी के गृह वार्ड और कनखल क्षेत्र से हराकर अभी से आयना दिखा दिया है भगवान हर और श्रीहरि दोनों की ऐसी कृपा रही कि हरिद्वार डूबते-डूबते बच गया मेयर कांग्रेस का पार्षद भाजपा के अब बोर्ड अच्छा चलेगा इसी का नाम लोकतंत्र है।  

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