हरिद्वार। महामण्डलेश्वर स्वामी विज्ञानानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि नवमी तिथि पूर्णता की द्योतक होती है और नौ की संख्या भी पूर्णांक होती है इस तिथि को जो व्यक्ति अन्तर्रात्मा की आवाज पर किसी भी प्रकार का इच्छित कार्य करता है उसमें पूर्ण सफलता प्राप्त होती है वे आज दक्षनगरी के विष्णु गार्डन स्थित श्री गीता विज्ञान आश्रम में अक्षय नवमी के उपलक्ष में आयोजित श्री विष्णु महायज्ञ के अवसर पर पधारे श्रद्धालुओं को श्रीहरि एवं मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के विधान की जानकारी दे रहे थे।
भगवान श्रीहरिविष्णु को जग का पालनहार बताते हुए कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि के सृजनकाल से ही उसके पालन पोषण का दायित्व भगवान स्वयं संभालते हैं और जो भक्त किसी यज्ञ या अनुष्ठान के माध्यम से भगवान विष्णु का आवाह्न करता है तो माता लक्ष्मी भगवान श्रीहरि के साथ उस भक्त के घर में वास करती हैं। तन तथा मन की शुद्धता को भगवान की स्तुति का उत्तम माध्यम बताते हुए उन्हांेने कहा कि मां गंगा सृष्टि की प्रत्यक्ष देवी तथा भगवान सूर्य सृष्टि के प्रकट देवता हैं और सूर्य की ऊर्जा से ही सम्पूर्ण भूमण्डल को शक्ति प्राप्त होती है। अक्षय नवमी को परिवार एवं समाज के लिए कल्याणकारी बताते हुए कहा कि अनुष्ठान से ही तपोबल की प्राप्ति होती है जिससे आत्मबल प्रबल होता है और व्यक्ति उन्नति की ओर अग्रसर होता है। इस अवसर पर पंजाब, हिमाचल तथा हरियाणा से आये भक्तों ने संयुक्त रुप से यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की।
भगवान श्रीहरिविष्णु को जग का पालनहार बताते हुए कहा कि सम्पूर्ण सृष्टि के सृजनकाल से ही उसके पालन पोषण का दायित्व भगवान स्वयं संभालते हैं और जो भक्त किसी यज्ञ या अनुष्ठान के माध्यम से भगवान विष्णु का आवाह्न करता है तो माता लक्ष्मी भगवान श्रीहरि के साथ उस भक्त के घर में वास करती हैं। तन तथा मन की शुद्धता को भगवान की स्तुति का उत्तम माध्यम बताते हुए उन्हांेने कहा कि मां गंगा सृष्टि की प्रत्यक्ष देवी तथा भगवान सूर्य सृष्टि के प्रकट देवता हैं और सूर्य की ऊर्जा से ही सम्पूर्ण भूमण्डल को शक्ति प्राप्त होती है। अक्षय नवमी को परिवार एवं समाज के लिए कल्याणकारी बताते हुए कहा कि अनुष्ठान से ही तपोबल की प्राप्ति होती है जिससे आत्मबल प्रबल होता है और व्यक्ति उन्नति की ओर अग्रसर होता है। इस अवसर पर पंजाब, हिमाचल तथा हरियाणा से आये भक्तों ने संयुक्त रुप से यज्ञ में आहुति देकर विश्व कल्याण की कामना की।
Comments
Post a Comment