Skip to main content

सफेद हाथियों को झेलने के लिए असमंजस में फंसी हरिद्वार की जनता

हरिद्वार। स्थानीय निकाय चुनाव में हरिद्वार की जनता के सामने बहुत बड़ी असमंजस की स्थिति है। एक तरफ खाई तो दूसरी तरफ कुंआ है, जनता के लिए दोनों ही खतरनाक हैं खाई भी कुंआ भी इस जनता का दुर्भाग्य देखंे कि इसको गिरना भी इन्हीं दोनों में से एक में है क्योंकि तीसरा विकल्प ही नहीं है। यह स्थिति हरिद्वार ही नहीं पूरे उत्तराखण्ड की है इसीलिए ये राजनेता रुपी सफेद हाथी बारी-बारी से जनता को बना रहे हैं। जनता अब तक बनी है और आगे भी बनती रहेगी, नेता और अधिकारी क्या थे क्या बन गए, सरकारी नौकरी वाले चपरासी से प्रशासनिक अधिकारी बन गए, पुलिस में दरोगा से सीओ और एस.पी. बन गए। नेताओं में जो वार्ड मेम्बर और ग्राम प्रधान बनने की हैसियत नहीं रखते थे वे विधायक बन गए जिनकी मंत्री बनने की हैसियत नहीं थी न कभी बने वे मुख्यमंत्री बन गए लेकिन जनता कहां है? राज्य कहां है? विकास कहां है? हरिद्वार का धार्मिक महत्व कहां चला गया क्यों बिक रही गली-गली में शराब, क्यों शराब के ठेके आ गए नगर निगम की सीमा में, कहां गया वह म्यूनिसिपल बायलाज, कहां चली गयी कुम्भ भूमि और किसने कराये सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और किसने उजाड़ा दुकानदारों एवं खोखे पटरी वालों को, किसने किया कुम्भ मेला 2010 में जमकर भ्रष्टाचार और कैसे चमकी एक दूध और मावा व्यापारी की किस्मत। वर्तमान स्थानीय निकाय चुनाव में जनता वास्तव में ऐसे दोराहे पर खड़ी है जहां अंधेरा है उसे कुछ दिखायी नहीं देता कि वह कहां जाये जनता जानती है कि चुनाव के बाद वह ठगी जायेगी अब जनता को कुंआ और खाई में से एक विकल्प अपने गिरने के लिए चुनना है। कांग्रेस का नियम है कि उसका कोई भी नेता या कार्यकर्त्ता चुनाव के अलावा जनता के पास कभी दुःख दर्द पूछने जाता ही नहीं वैसे भी कांग्रेस के पास कार्यकर्त्ता नहीं हैं, केवल नेता ही नेता बचे हैं और नेता की अपनी शान होती है जनता उसके पास आये वह जनता के पास क्यों जायें? कांग्रेस की इसी हेकड़ी ने हरिद्वार में कई नामी गिरामी राजनेताओं के वजूद समाप्त कर दिए। कांग्रेस का एक जामना था कि पारस कुमार जैन, विकास चौधरी, रामयश सिंह, अमरीश कुमार, सुधीर गुप्ता जैसों की तूती बोलती थी आज सभी नेपथ्य में चले गए। जो कार्यकर्त्ता से नेता में परिवर्तित हुए उनको उनकी अकड़ खा गई। जो संत से नेता बने उन्हें अपने गृह राज्य का मोह खा गया। जब कांग्रेस ने राजनीति से हाथ खड़े कर दिए तब साम्प्रदायिक शक्तियों ने धर्म के कन्धे पर रखकर अपनी राजनीति की बन्दूक चलायी और धर्मनगरी में ऐसी धुंआधार की कि आज जनता भी रो रही है और धर्मनगरी की मर्यादायें भी नष्ट हो गयीं।
हरिद्वार की वर्तमान स्थिति यह है कि जो धर्मनगरी की धार्मिक विचारधारा एवं संस्कृति के संवाहक हैं उनकी कहीं भी कोई गिनती नहीं है। हरिद्वार में राजनीति के निर्णय करने वाले दो लोग हैं एक तो वे जो देश के बंटवारे के समय दूसरे देश से आये और दूसरे वे जो नया राज्य बनने के बाद अपने ही देश और राज्य से आकर हरिद्वार में बसे, यह सत्यता है और जो इस बात को जान गया वही आज हरिद्वार की राजनीति में सफलता की बुलंदियों पर है क्योंकि बाहर से आने वाले को यहां की मूल भावना से कोई लेना-देना नहीं वह केवल अपना भला चाहता है। वह अपने स्वार्थ के लिए कुछ भी कर सकता है। चूंकि हरिद्वार एक पर्यटक एवं यात्री बाहुल्य क्षेत्र है यहां की राजनीति का निर्धारण भी बाहर से आये मतदाता करते हैं तो यहां से नेता भी बाहरी ही चुनाव लड़ते हैं। रामसिंह मांडेवास हों या महावीर राणा, एस.पी. सिंह इंजीनियर हों या मायावती एवं रामविलास पासवान, हरीश रावत हों या डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक या भाजपा की वर्तमान मेयर प्रत्याशी। जब नेता भी बाहरी मतदाता भी बाहरी फिर कैसा कुंआ और कैसी खाई, जब ओखली में सिर दे दिया तो मूसल की चोट का दर्द ही क्यों महसूस करना। धर्मनगरी में खूब बिकवाओ शराब हर चौराहे पर, करवाओ हेलमेट के नाम पर वसूली, अतिक्रमण के नाम पर तोड़फोड़ और ध्वस्तीकरण। धर्म के नाम पर राजनीति इतने चरम पर पहुंच जायेगी कि जिस तरह होली, दीपावली और कांवड़ मेला कई मामलों में प्रतिबंधित हो गया उसी तरह आगामी कुम्भ भी किसी दूसरी जगह पर ही लगेगा।

Comments

Popular posts from this blog

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

उत्तराखण्ड राज्य निर्माण के सपनों को साकार करेगी प्रसपा: फुरकान अली एडवोकेट

हरिद्वार ।   प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के प्रत्याशी फुरकान अली एडवोकेट के मुख्य चुनाव कार्यालय का उद्घाटन आज ज्वालापुर रेलवे फाटक के निकट शारदानगर स्थित कैम्प कार्यालय पर हाजी सरफुद्दीन तथा चौ. संसार सिंह एवं चुनाव प्रभारी बलजीत कौर ने संयुक्त रुप से रिबन काटकर करते हुए उत्तराखण्ड में राज्य निर्माण का सपना साकार करने वाले क्षेत्रीय दल का आगाज किया। उद्घाटन सभा को सम्बोधित करते हुए हाजी सरफुद्दीन ने कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी समाजवाद के माध्यम से उत्तराखण्ड को प्रगति के मार्ग पर प्रशस्त करेगी। लोकसभा चुनाव को उत्तराखण्ड की संसद में आवाज उठाने का शुभारम्भ बताते हुए कहा कि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी डॉ. राम मनोहर लोहिया की विचारधारा को मूर्त रुप देकर राज्य के गरीब, मजदूर एवं किसानों के हितों की रक्षा के लिए कार्य करेगी। उत्तराखण्ड राज्य में कृषि एवं कृषक की अनदेखी को राज्य के पिछड़ने का मुख्य कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि अब तक सत्तासीन रहे राजनैतिक दलों ने नए राज्य के उद्देश्यों को दरकिनार कर अपनी जेबें भरने के अलावा कुछ नहीं किया। परिणाम स्वरुप पहाड़ों से हुए पलायन...

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...