Skip to main content

रामलीला है सनातन संस्कृति एवं संस्कारों की संवाहक : मदन कौशिक


  • कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एवं मं. केदारपुरी ने किया बड़ी रामलीला का शुभारम्भ

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी के तत्वावधान में आयोजित हरिद्वार की बड़ी रामलीला के मंचन का शुभारम्भ आज उत्तराखण्ड सरकार के प्रतिनिधि के रुप में नगर विकास मंत्री तथा राज्य सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक एवं धर्मगुरुओं की तरफ से जूना अखाड़ा के श्रीमहंत केदा

रपुरी महाराज ने संयुक्त रुप से किया।
रामलीला मंचन का शुभारम्भ कराते हुए कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि रामलीला का दर्शन संस्कार एवं संस्कृति का संवाहक है और श्रीरामलीला कमेटी अपने रंगमंच से जिन प्रेरणादायी दृश्यों का मंचन करती है उससे निश्चित ही हमारी युवा पीढ़ी अपने अतीत से गौरवान्वित होकर चरित्र निर्माण के साथ ही मर्यादित आचरण को अपने जीवन में उतरेगी। संत-महापुरुषों की तरफ से श्रीरामलीला कमेटी के सद्प्रयासांे की सराहना करते हुए श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के श्रीमहंत केदारपुरी महाराज ने कहा कि नैतिक पतन के इस युग में धार्मिक आयोजनों का महत्व और बढ़ गया है तथा श्रीरामलीला कमेटी सामाजिक उन्नयन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका का निर्वाह करने के लिए साधुवाद की पात्र है। श्रीरामलीला सम्पत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष गंगाशरण मद्दगार ने अतिथि तथा संत-महापुरुषों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने श्रीरामलीला कमेटी के उद्देश्यों की पूर्ति करने के लिए पदाधिकारी तथा कलाकारों की तरफ से आश्वासन देते हुए दर्शकों से भी सहयोगी की कामना की।
श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट के संचालन एवं मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ के निर्देशन में सर्वप्रथम सतयुग कालीन दैवीय व्यवस्था को इन्द्र दरबार के रुप में प्रस्तुत किया गया जिसमें देवताओं के राजा इन्द्र को यह सूचना दी गई कि देवर्षि नारद इस सिंहासन को प्राप्त करने के लिए तपस्या कर रहे हैं। इन्द्र ने अपने सिंहासन को बचाने के लिए कामदेव को नारद की तपस्या भंग करने के लिए भेजा लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी कामदेव सफल नहीं हुए तो उन्होंने नारद से माफी मांगी। भगवान शिव के बाद कामदेव पर सफलता पाने वाले देवर्षि नारद दूसरे नम्बर पर आ गए तो उन्हें अभिमान हो गया जो भगवान शिव तथा श्रीहरि को अच्छा नहीं लगा। नारद का अभिमान समाप्त करने के लिए भगवान ने उन्हें एक राजकन्या के स्वयंवर में जाने के लिए बन्दर का स्वरुप प्रदान किया जिससे उनकी खिल्ली उड़ी और विवाह से इसलिए वंचित कर दिया गया कि देवलोक की व्यवस्था बिगड़ जाती। समाज और राष्ट्र की व्यवस्था बनाना ही रामलीला मंचन का उद्देश्य है इसीलिए प्राचीन परम्पराओं को रंगमंच के माध्यम से समाहित किया जाता है। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि शनिवार को रात्रि रंगमंच पर दशरथ दरबार, विष्णु लोक, इन्द्र दरबार तथा रामजन्म की लीला का दर्शन कराया जायेगा। श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच के प्रथम दिवस की व्यवस्था बनाने में विशेष योगदान देने वालों में प्रमुख थे वीरेन्द्र चड्ढा, रविकान्त अग्रवाल, रविन्द्र अग्रवाल, सुनील भसीन, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, डॉ. संदीप कपूर, अनिल सुखीजा, नरेन्द्र शर्मा, कन्हैया खेवड़िया, रमन शर्मा, राकेश गोयल, सुनील वधावन, देवेन्द्र चड्ढा, पवन शर्मा, महेश गौड़, विकास सेठ, मुरलीधर अग्रवाल तथा राहुल वशिष्ठ सहित अधिकांश पदाधिकारी उपस्थित थे।

Comments

Popular posts from this blog

चुनौती बनता जा रहा है समाचारों पत्रों का संचालन

समाचार-पत्र समाज के मार्ग दर्शक होते हैं और समाज के आईना (दर्पण) भी होते हैं, समाचार-पत्र का प्रकाशन एक ऐसा पवित्र मिशन है जो राष्ट्र एवं समाज को समर्पित होता है। समाचार-पत्र ही समाज और सरकार के बीच एक सेतु का काम करते हैं, जनता की आवाज सरकार तक तथा सरकार की योजनायें जनता तक पहुंचाकर विकास का सोपान बनते हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के बाद से लगभग पांच दशक तक समाचार-पत्रों ने सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका का निर्वाह किया। 1975 में लगे आपातकाल से भी समाचार-पत्र विचलित नहीं हुए और उन्होंने अपने पत्रकारिता धर्म का निर्वाह किया ऐसा तब तक ही हुआ जब तक पत्रकार ही समाचार पत्र के प्रकाशक, स्वामी एवं संपादक होते थे ऐसा अब नहीं है।  समाचार पत्रों की निष्पक्षता और निर्भीकता कुछ पंूजीपतियों को रास नहीं आयी और उन्होंने मीडिया जगत पर अपना प्रभुत्व जमाना प्रारम्भ कर दिया। पहले तो समाचार-पत्रों की जनता से पकड़ ढीली करने के लिए इलैक्ट्रोनिक मीडिया को जन्म दिया और बाद में प्रिंट मीडिया का स्वरुप बदल कर उसके मिशन को समाप्त कर व्यावसायिकता में बदल दिया। चंद पूंजीपतियों ने सरकार से सांठगांठ कर मीडिया...

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...