हरिद्वार। भारतवर्ष की प्राचीन सनातन परम्परा से

वर्तमान पीढ़ी को गौरवान्वित करने वाली बड़ी रामलीला की आयोजक श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से सतयुग की उस व्यवस्था का दर्शन कराया जब न कोई राजनेता था और न ही कोई चुनाव होते थे सम्पूर्ण व्यवस्था का संचालन दैवीय सत्ता के अधीन था जिसे सतयुग कहते थे। श्रीरामलीला कमेटी ने उस सत्य के युग को समाज में समाहित करने के लिए आज विष्णु लोक, दशरथ दरबार तथा रामजन्म की लीला से दर्शकों को अभिभूत किया। श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट के संचालन तथा मुख्य दिग्दर्शक महाराजकृष्ण सेठ के निर्देशन में रंगमंच पर उस दृश्य को प्रस्तुत किया गया जिसमें राक्षसी अत्याचार बढ़ने से पृथ्वी थर्राने लगी और देवर्षि नारद के साथ देवताओं के राजा इन्द्र के दरबार में पहुंची जहां से सभी देवता विष्णु लोक पहुंचे और श्रीहरि को पृथ्वी के दर्द से अवगत कराया भगवान ने उन्हें शीघ्र ही धरती पर अवतरित होकर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया।
श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने अपने रंगमंच से त्रेता युग की उस संस्कृति का दर्शन कराया जब मैथुनसृष्टि नहीं थी और मंत्रसृष्टि से ही संतानोत्पति होती थी इच्छित वर की प्राप्ति के लिए तप करना पड़ता था तथा इच्छित संतान की प्राप्ति के लिए यज्ञ अनुष्ठान करना पड़ता था। अयोध्या के राजा दशरथ ने भी अपनी वृद्धावस्था से जब अपने राजगुरु वशिष्ठजी को अवगत कराया तो उन्होंने श्रंृगीऋषि के माध्यम से यज्ञ कराया और यज्ञ का प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही राजा दशरथ को पुत्रों की प्राप्ति हुई। भगवान श्रीहरि के धराधाम पर अवतरण के दुर्लभ दृश्य का दर्शन कराते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि भगवान जब चतुर्भुज रुप में प्रकट हुए तो माता कौशल्या ने उनसे बालरुप में अवतरित होकर माता-पिता को धन्य करने का अनुरोध किया तो भगवान ने मां के आदेश का पालन करते हुए बाल रुप में अपने दर्शन देकर अयोध्या धाम को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया। भगवान राम के बालरुप की आरती उतार कर भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्द्धन के माध्यम से विश्व कल्याण की कामना करने वालों में प्रमुख थे गंगाशरण मद्दगार, वीरेन्द्र चड्ढा, रविकान्त अग्रवाल, रविन्द्र अग्रवाल, सुनील भसीन, विनय सिंघल, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, डॉ. संदीप कपूर, कन्हैया खेवड़िया, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, राकेश गोयल, नरेन्द्र शर्मा, सुनील वधावन, रमन शर्मा, अनिल सुखीजा, देवेन्द्र चड्ढा, विकास सेठ तथा महेश गौड़ सहित सभी सदस्य एवं पदाधिकारियों ने रामजन्म का प्रसाद वितरित कर जन्मोत्सव की खुशियां मनायीं। श्रीरामलीला कमेटी के प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि 8 अक्टूबर को पुष्प वाटिका, जनकपुरी तथा 9 अक्टूबर को रावण वाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ तथा लक्ष्मण परशुराम संवाद के अद्भुत दृश्य का मंचन होगा जिसमें परशुराम के रुप में जाने-माने कलाकार डॉ. राकेश खन्ना अपने अनुभवों की छटा बिखेरेंगे।
श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने अपने रंगमंच से त्रेता युग की उस संस्कृति का दर्शन कराया जब मैथुनसृष्टि नहीं थी और मंत्रसृष्टि से ही संतानोत्पति होती थी इच्छित वर की प्राप्ति के लिए तप करना पड़ता था तथा इच्छित संतान की प्राप्ति के लिए यज्ञ अनुष्ठान करना पड़ता था। अयोध्या के राजा दशरथ ने भी अपनी वृद्धावस्था से जब अपने राजगुरु वशिष्ठजी को अवगत कराया तो उन्होंने श्रंृगीऋषि के माध्यम से यज्ञ कराया और यज्ञ का प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही राजा दशरथ को पुत्रों की प्राप्ति हुई। भगवान श्रीहरि के धराधाम पर अवतरण के दुर्लभ दृश्य का दर्शन कराते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि भगवान जब चतुर्भुज रुप में प्रकट हुए तो माता कौशल्या ने उनसे बालरुप में अवतरित होकर माता-पिता को धन्य करने का अनुरोध किया तो भगवान ने मां के आदेश का पालन करते हुए बाल रुप में अपने दर्शन देकर अयोध्या धाम को ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया। भगवान राम के बालरुप की आरती उतार कर भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्द्धन के माध्यम से विश्व कल्याण की कामना करने वालों में प्रमुख थे गंगाशरण मद्दगार, वीरेन्द्र चड्ढा, रविकान्त अग्रवाल, रविन्द्र अग्रवाल, सुनील भसीन, विनय सिंघल, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, डॉ. संदीप कपूर, कन्हैया खेवड़िया, पवन शर्मा, राहुल वशिष्ठ, राकेश गोयल, नरेन्द्र शर्मा, सुनील वधावन, रमन शर्मा, अनिल सुखीजा, देवेन्द्र चड्ढा, विकास सेठ तथा महेश गौड़ सहित सभी सदस्य एवं पदाधिकारियों ने रामजन्म का प्रसाद वितरित कर जन्मोत्सव की खुशियां मनायीं। श्रीरामलीला कमेटी के प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि 8 अक्टूबर को पुष्प वाटिका, जनकपुरी तथा 9 अक्टूबर को रावण वाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ तथा लक्ष्मण परशुराम संवाद के अद्भुत दृश्य का मंचन होगा जिसमें परशुराम के रुप में जाने-माने कलाकार डॉ. राकेश खन्ना अपने अनुभवों की छटा बिखेरेंगे।
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