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बड़ी रामलीला ने कराया प्राचीन सनातन संस्कृति का दर्शन


हरिद्वार। उत्तराखण्ड एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी रामलीला की आयोजक श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर आज कैलाश लीला, रावण अत्याचार तथा रावण वेदवती संवाद का मचंन किया गया जिसमें रावण को अहंकार एवं अत्याचार का आभास कराकर क्षमादान दिया गया वहीं भारतीय नारी का गौरव स्थापित करने के लिए ऋषि कन्या वेदवती ने रावण के स्पर्श को अपवित्र मानते हुए स्वयं को अग्नि के हवाले कर दिया।
श्रीरामलीला कमेटी ने अपने रंगमंच से तप एवं त्याग को जीवन सुधारने एवं इच्छित फल प्राप्त करने के माध्यम के रुप में प्रस्तुत करते हुए दिखाया कि रावण, कुम्भकरण और विभीषण ने जब तप किया तो ब्रह्माजी ने इच्छित वरदान दे दिए। वरदान पाते ही रावण को अभिमान हो गया और उसने अत्याचार प्रारम्भ कर दिए। रावण ने मंदोदरी से विवाह कर लंका दहेज में मांगी तथा कुबेर सहित सभी देवताओं को बंदी बनाकर स्वयं लंका का राजा बना। श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट एवं मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ के निर्देशन में रंगमंच पर कैलाश पर्वत का वह दृश्य प्रस्तुत किया गया जिसमें रावण कैलाश पर्वत पार करना चाहता था तो नंदी ने उसे रोका लेकिन अभिमान में चूर रावण ने जब कैलाश पर्वत को हिलाने का प्रयास किया तो वह स्वयं उसके भार से दब गया तभी भोलेनाथ ने न केवल उसकी हठधर्मी को माफ किया बल्कि अपनी चन्द्रहास तलवार देकर उसे सत्कर्मों के आधार पर ख्याति अर्जित करने का आशीर्वाद दे दिया। रंगमंच से भारत की मातृशक्ति को गौरवान्वित करते हुए रामलीला कमेटी ने ऋषि कन्या वेदवती के उस स्वरुप को प्रदर्शित किया जिसमें वह भगवान विष्णु को वर रुप में प्राप्त करने के लिए तप कर रही थी लेकिन रावण ने जब कुदृष्टि डाली तो वेदवती ने स्वयं को आग के हवाले करने से पूर्व रावण को अभिशाप दिया कि त्रेता में वही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी तथा भगवान विष्णु के अवतारी के हाथों से ही उसके अभिमान एवं अहंकार के साथ सम्पूर्ण राजपाट एवं परिवार का अंत होगा। रामलीला कमेटी अपने ऐसे ही दृश्यों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार कर समाज को सत्कर्म करने की प्रेरणा देती है। श्रीरामलीला कमेटी के प्र्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि रविवार 7 अक्टूबर को सीता जन्म एवं ताड़का वध की लीला का मंचन किया जायेगा उन्होंने बताया कि ताड़का वध की लीला बड़ी महत्वपूर्ण होती है जो समाज से अत्याचारी के अंत को प्रदर्शित कर सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है जबकि सोमवार को परशुराम तपस्या के रुप में डॉ. रमेश खन्ना की अद्भुत प्रस्तुति के द्वारा दर्शक अपने अतीत से गौरवान्वित होंगे। भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति को अपने रंगमंच के माध्यम से समाज में समाहित करने में सहयोग प्रदान करने वालों में प्रमुख हैं गंगाशरण मद्दगार, वीरेन्द्र चड्ढा, रविकान्त अग्रवाल, सुनील भसीन, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, डॉ. संदीप कपूर, रविन्द्र अग्रवाल, राकेश गोयल, कन्हैया खेवड़िया, राहुल वशिष्ठ, महेश गौड़, नरेन्द्र शर्मा, सुनील वधावन, विकास सेठ, रमन शर्मा, अनिल सुखीजा, पवन शर्मा, देवेन्द्र चड्ढा तथा मुरलीधर अग्रवाल।

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