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जीवन की जीने की कला का दर्शन कराती है श्रीरामलीला कमेटी


हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज हनुमान रावण संवाद एवं लंका दहन के साथ समाज की नीति, व्यवस्था एवं मर्यादाओं का मार्मिक दर्शन कराकर वर्तमान पीढ़ी को अतीत से गौरवान्वित किया। रंगमंच से राम एवं रावण दोनों की संयुक्त रुप से प्रस्तुत की गयी नीतियों को दर्शकों ने भावुकता के साथ आत्मसात किया तथा रामलीला जैसे आयोजनों का अधिक से अधिक संख्या में पहंुच कर दर्शन लाभ लिया। रामलीला को जीवन जीने की कला के रुप में प्रस्तुत करने वाली श्रीरामलीला कमेटी के अनुभवी पदाधिकारियों में कृष्णमूर्ति भट्ट, महाराजकृष्ण सेठ, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’ के साथ ही रविकान्त अग्रवाल एवं सुनील भसीन ने रंगमंच पर दर्शाये गये दृश्यों की पुनरावृत्ति न कर समय की आवश्यकता के अनुरुप उनके समयानुकूल परिवर्तित स्वरुप की प्रस्तुति से रामलीला की ग्राह्ययता को और विश्वसनीयता प्रदान की। श्रीरामलीला कमेटी ने अपने रंगमंच से दर्शाया कि व्यक्ति को कभी भी निराश नहीं होना चाहिए, न ही संकट में घबराना चाहिए। माता सीता ने रावण की अशोक वाटिका में राक्षसी सुरक्षा में रहते हुए भी अपना धैर्य नहीं खोया और रावण को मुंहतोड़ जवाब देकर अपने पतिव्रता नारी होने का परिचय दिया तो हनुमान ने लंका जाकर माता सीता को भगवान श्रीराम की मुद्रिका देकर उनके साहस को संबल प्रदान किया तथा माता सीता की शंका का समाधान करने के लिए ही हनुमान ने अशोक वाटिका को उजाड़ा, रावण पुत्र अक्षय कुमार का वध किया लेकिन मेघनाथ की ब्रह्मफांस में बंधकर जब वे रावण दरबार में पहुंचे तब भी उन्हांेने श्रीराम की शक्ति का ही वर्णन किया।
त्रेता युग की मर्यादाओं एवं युद्धनीति का दर्शन कराते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि रावण चाहे कितना ही बड़ा अहंकारी व अत्याचारी रहा हो लेकिन अशोक वाटिका में माता सीता से मिलने कभी अकेला नहीं गया और रामदूत हनुमान को अपने पुत्र का हत्यारा होने के बाद भी न तो मारा न ही कारागार में डाला बल्कि लंका में आग लगाने जैसे जुर्म का दोषी होते हुए भी लंका से जाने दिया क्योंकि उसका एकमात्र उद्देश्य भगवान श्रीराम के हाथों अपनी मुक्ति थी इसीलिए न तो उसने किसी का परामर्श माना और न ही किसी परिजन की मृत्यु पर दुःख व्यक्त किया। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि गुरुवार को कुम्भकरण, मेघनाद वध तथा सुलोचना विलाप की लीला का मंचन किया जायेगा तथा शुक्रवार 19 अक्टूबर को रोड़ी बेलवाला मैदान पर भव्य दशहरा पर्व का आयोजन होगा जिसमें गत वर्षों की तुलना में और संशोधन करते हुए भव्यता एवं दिव्यता का समावेश किया गया है। श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र चड्ढा ने बताया कि भगवान श्रीराम की इस लीला का मंचन शुद्ध रुप से समाज में संस्कार एवं संस्कृति का समावेश करने के उद्देश्य से किया जाता है तथा सामयिक परिस्थिति के अनुरुप दृश्यों के स्वरुप को भी संशोधित किया जाता है। श्रीरामलीला के दर्शकों की बढ़ी संख्या तथा अनुशासन बनाये रखने के लिए सभी दर्शकों को साधुवाद देते हुए उन्होंने कहा कि इतने बड़े जनसमुदाय का अनुशासित रहना भगवान श्रीराम की कृपा का ही प्रसाद है जिसके लिए श्रीरामलीला कमेटी के सभी पदाधिकारी प्रतिवर्ष दो माह का समय भगवान राम की सेवा में समर्पित करते हैं। लीला का शुभारम्भ हनुमान चालीसा के साथ लीला विश्राम पर हनुमान जी की आरती उतार कर समाज के कल्याण एवं चरित्र निर्माण की कामना करने वालों मंे प्रमुख थे गंगाशरण मद्दगार, रविकान्त अग्रवाल, सुनील भसीन, महाराजकृष्ण सेठ, रविन्द्र अग्रवाल, विनय सिंघल, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, नरेन्द्र शर्मा, डॉ. संदीप कपूर, राहुल वशिष्ठ, कन्हैया खेवड़िया, रमन शर्मा, महेश गौड़, विकास सेठ, श्रीकृष्ण खन्ना, पवन शर्मा, सुनील वधावन तथा अनिल सुखीजा।

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