Skip to main content

यूपी में जंगलराज

हरिद्वार। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 29 सितम्बर की रात्रि में पुलिस की गोली से हुई एप्पल कम्पनी के प्रबंधक विवेक तिवारी की हत्या से पूरा देश स्तब्ध है, इस घटना से पुलिस ने जनता का विश्वास खो दिया और राज्य तथा केन्द्र सरकार से भी देशवासियों का मोह भंग हो गया है। जिस प्रकार घटना के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस के आला अधिकारियों ने हत्या को नया मोड़ देने की कोशिश की और केन्द्र सरकार के किसी मंत्री या स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा कोई संज्ञान न लेना एवं मानव अधिकार जैसी संस्था की खामोशी कुछ और ही बयां कर रही है। उधर उत्तर प्रदेश पुलिस के कर्मचारियों ने हत्यारोपी सिपाही की पत्नी जो स्वयं यूपी पुलिस में सिपाही है के खाते में बड़ी मात्रा में धन जमा करना प्रारम्भ कर दिया जिससे पुलिस की मंशा स्पष्ट हो चुकी है। यह घटना अकेले विवेक तिवारी की हत्या की नहीं है बल्कि उत्तर प्रदेश में जब से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनी तभी से पुलिस का गुण्डाराज चल रहा है और अब तक 67 एनकाउन्टर की घटनायें हो चुकी हैं यह सब राज्य सरकार द्वारा पुलिस को खुली छूट देने का ही नतीजा है कि यूपी पुलिस पूरी तरह से निरंकुश हो गयी है। आम जनता का सड़कों पर खुलेआम घूमना ही अपराध की श्रेणी में ला दिया गया है।
देश की जनता आज अपने कृत्य की सजा भुगत रही है एक कहावत है कि जो जैसा करता है वह वैसा ही भरता है क्योंकि कर्म प्रधान विश्व रचि राखा जैसी सूक्तियों का वर्णन हमारे ग्रंथों में भी है। अति सर्वत्र वर्जयते का पाठ भी हमारे ऋषि-मुनियों ने दो युग पूर्व ही पढ़ा दिया था। हमारे देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसको भली प्रकार संचालित करने के लिए विपक्ष का मजबूत होना आवश्यक होता है। जनता ने विपक्ष को कमजोर कर दिया इसीलिए सत्तापक्ष मनमानी कर रहा है। चाहे नोटबंदी हो या जीएसटी, महंगाई और बेरोजगारी की वृद्धि तथा आय में कमी होना यह सब सत्ता पक्ष की हिटलरशाही का प्रमाण है।
हद तो तब हो गयी जब यूपी जैसे बडे़ राज्य की जनता पर एक ऐसा मुखिया थोप दिया गया जो भिक्षावृत्ति कर पेट पालता था उसे राज सिंहासन दे दिया तो अब कलियुग को क्यों कोस रहे। जिस विभाग को कड़े अनुशासन में रखा जाता उसे एनकाउन्टर करने की खुली छूट दे दी गई। इससे पूर्व ऐसी घटना होते ही विपक्ष मुख्यमंत्री को हटाने की मांग करने लगता था लेकिन आज विपक्ष चुपचाप बैठा तमाशा देख रहा है क्योंकि जनता भी इन्हीं अच्छे दिनों की भूखी थी उसे अपनी तमन्ना पूरी करने का पूरा मौका मिलना चाहिए शेष रही विकल्प की बात तो विकल्प तो सभी को मिल जाता है और जब अति हो जायेगी तो अच्छा विकल्प आयेगा।

Comments

Popular posts from this blog

गठबंधन और भाजपा के मुकाबले को त्रिकोणीय बनायेगी जविपा सेक्यूलर

राष्ट्रीय अध्यक्ष एन.पी. श्रीवास्तव ने किया गोरखपुर से नामांकन लखनऊ। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के राष्ट्रीय अध्यक्ष नाम प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा है कि किसान और जवान का सम्मान ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार है और भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की स्थापना के लिए देश की 70 प्रतिशत ग्रामीण आबादी के सम्मान के लिए कार्य करना होगा। उक्त उद्गार उन्होंनेे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से वार्ता कर ते हुए व्यक्त किए। जन विकास पार्टी सेक्यूलर के गठन एवं उद्देश्यों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे देश के अधिकांश राजनैतिक दल शहरीकरण की आंधी में गुम हो गए हैं और गांव एवं देहात की सत्तर प्रतिशत आबादी को विस्मृत कर दिया है। उन्होंने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिए गए ‘जय जवान जय किसान’ के नारे को सार्थक करने की हामी भरते हुए कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए गांवों का विकास आवश्यक है और जन विकास पार्टी सेक्यूलर सत्ता में आने पर सबसे पहले कृषकों को उनकी उपज का मूल्य मेहनत मजदूरी के साथ देकर किसानों को मजबूत करेगी तथा कृषि मजदूरों को...

परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना से हो जाते हैं असंभव कार्य भी संभव

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से परस्पर सहयोग एवं मैत्री भावना के उस दृश्य का अवलोकन कराया जिसके तहत वो समस्याग्रस्त व्यक्ति यदि मैत्री भावना से एक-दूसरे का सहयोग करें तो दोनों के असंभव कार्य संभव हो जाते हैं और यदि कोई भक्त सच्ची भावना से भगवान का दर्शन करना चाहता है तो भगवान स्वयं उसके घर पर आकर दर्शन देते हैं। सुग्रीव मैत्री तथा शबरी राम दर्शन के दृश्यों का मंचन करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि शबरी एक भील कन्या थी लेकिन भगवान राम का दर्शन करने की उसकी दिली इच्छा थी तो भगवान राम ने स्वयं उसकी कुटिया में जाकर दर्शन दिए तथा उसके झूठे बेर भी खाये। लक्ष्मण द्वारा शबरी के बेर न खाकर फेंकने पर श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा कि दीनहीन व्यक्ति ही दीनानाथ का स्वरुप होता है और जो बेर उन्हांेने फेंके हैं वे ही संजीवनी बूटी के रुप में उनकी मूर्छा को दूर करेंगे। श्रीराम सुग्रीव मैत्री को रामलीला के सर्वाधिक प्रेरणादायी दृश्य के रूप में प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि भगवान श्रीराम एवं सुग्रीव दोनों की समस्यायें समान थीं दोनों अपने-अपने राजपाट से वं...

राम और रावण ने संयुक्त रुप से की रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की स्थापना

हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी ने 3 अक्टूबर से प्रारम्भ हुए रामलीला रुपी अनुष्ठान की अंतिम बेला में आज सेतुबन्ध रामेश्वरम् में ज्योतिर्लिंग की उस अद्भुत स्थापना का दृश्य प्रस्तुत किया जिसमें भगवान श्रीराम तथा रावण ने संयुक्त रुप से शिवोपासना कर धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से वैर भावना को भुलाने का संदेश दिया रामलीला का यह दृश्य चरित्र एवं मर्यादा की उस सीमा का पर्याय बन गया जब श्रीराम ने रावण को मुक्ति का वरदान दिया तो रावण ने राम को आसन्न युद्ध में विजयी होने का आशीर्वाद दिया। रावण विद्वान, बलशाली, अहंकारी के साथ कर्मवीर भी था जिसने अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिए न किसी की राय मानी न ही अनुरोध। रावण दूरदृष्टा भी था इसीलिए उसने भाई विभीषण को लंका से निकाल दिया जो रामादल में सम्मिलित होकर लंका का राजा बना। रामलीला के बहुप्रतीक्षित अंगद-रावण संवाद की भी जमकर सराहना हुई। भगवान राम ने युद्ध के अंतिम क्षणों में भी शांतिदूत के रुप में अंगद को रावण के पास भेजा लेकिन रावण ने जानकी को देने के स्थान पर जान की बाजी देने का अपना निर्णय नहीं टाला और दोनों ओर से युद्ध की घोषणा हो गयी। श्रीरा...