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बड़ी रामलीला में ताड़का वध ने किया दर्शकों को रोमांचित


हरिद्वार। सतयुग एवं त्रेताकालीन संस्कृति को वर्तमान समाज में समाहित करने वाली बड़ी रामलीला की आयोजक श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से सीताजन्म एवं ताड़कावध के माध्यम से समाज की उस व्यवस्था का दर्शन कराया जो परिस्थितिजन्य होती है। राजा जनक के राज्य में जब सूखा पड़ा तो उन्होंने स्वयं हल चलाया तब सीता का अवतरण हुआ और यक्षिणी ताड़का के पति की जब एक ऋषि ने हत्या कर दी तभी से वह रक्ष संस्कृति अपना कर देवताओं की दुश्मन बन गयी तो भगवान राम को उसका वध करना पड़ा।
श्रीरामलीला कमेटी ने भारत की ऋषि परम्परा को राजधर्म की मार्गदर्शक बताते हुए दिखाया कि राक्षसों के बढ़ते अत्याचार को रोकने के लिए ही ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में गए उनसे राम लक्ष्मण को अपने साथ ले जाकर यज्ञ रक्षा करने का वास्ता दिया तो राजा दशरथ ने रघुकुल की परम्परा तथा राजधर्म का निर्वाह करते हुए अपनी आंखों के तारे राम एवं लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेज दिया। मुख्य दिग्दर्शक महाराजकृष्ण सेठ तथा दिग्दर्शक भगवत शर्मा ‘मुन्ना’ के निर्देशन में आज रामलीला के सर्वाधिक भावुक उस दृश्य की प्रस्तुति की गई जिसमें राजा जनक के राज्य में सूखा पड़ गया और जनता भूख से व्याकुल हो उठी। राजा को जनता का हितैषी होने का आदर्श प्रस्तुत करते हुए श्रीरामलीला कमेटी ने दिखाया कि राजा जनक को स्वयं जनता के दुःख-दर्द का एहसास हुआ और उन्होंने जनता के बीच जाकर न केवल उसकी समस्याओं का समाधान किया बल्कि वर्षा होने की कामना को लेकर स्वयं हल चलाया। राजा जनक के इसी पुरुषार्थ का परिणाम था कि हल का फल एक घड़े से टकराया और उस घड़े से सीतारुपी कन्या का अवतरण हुआ। श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट ने ताड़का वध से पूर्व लीला का सार समझाते हुए कहा कि ताड़का यक्षिणी थी लेकिन एक युद्ध में जब उसके पति की हत्या हो गयी तब उसने देवताओं का विरोध करने के लिए रक्ष संस्कृति अपनायी और दण्डिकारण्य पर उसका अधिपत्य हो गया। 
श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि दस अक्टूबर को भगवान श्रीराम के विवाह की भव्य शोभायात्रा नगर भ्रमण के माध्यम से होगी तथा बुधवार को रंगमंच का अवकाश रहेगा। इससे पूर्व सोमवार तथा मंगलवार की संगीतमय लीला के मंचन में संगीत दिग्दर्शक विनोद नयन का विशिष्ट योगदान रहेगा जिसमें पुष्प वाटिका, परशुराम तपस्या, जनकपुरी, रावण वाणासुर संवाद, धनुष यज्ञ तथा लक्ष्मण परशुराम संवाद की मौलिक प्रस्तुति होगी। परशुराम के रुप में हरिद्वार के वरिष्ठ पत्रकार एवं होटल व्यवसायी डॉ. रमेश खन्ना की भूमिका सराहनीय रहती है तथा उस दृश्य को देखने के लिए सम्पूर्ण पंचपुरी की जनता बड़ी रामलीला का दर्शन करती है। श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर प्रस्तुत ताड़का वध का दर्शन करने पहुंचे हजारों के जनसमूह को व्यवस्था प्रदान करने वालों में प्रमुख थे रविकान्त अग्रवाल, रविन्द्र अग्रवाल, सुनील भसीन, डॉ. संदीप कपूर, कन्हैया खेवड़िया, राहुल वशिष्ठ, पवन शर्मा, नरेन्द्र शर्मा, अनिल सुखीजा, राकेश गोयल, रमन शर्मा, सुनील वधावन, विकास सेठ तथा महेश गौड़ सहित सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा अन्त में ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान राम एवं लक्ष्मण की आरती उतार कर विश्व कल्याण की कामना की गई।

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