हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. अपना 93वां वार्षिकोत्सव भारत की प्राचीन संस्कृति को वर्तमान परिस्थिति के अनुरुप समाज के सामयिक परिवर्तन एवं प्रेरणा के रुप में मना रही है जिसके रंगमंच पर उन्हीं प्रेरणादायी प्रसंगों को प्रस्तुत किया जायेगा जो हमारी युवा पीढ़ी को मर्यादित आचरण एवं चरित्रवान बनने की शिक्षा दें।
श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट तथा मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ द्वारा सम्पूर्ण कमेटी के मतानुसार बनायी गयी विषय सूची के अनुरुप रंगमंच का शुभारम्भ नारदमोह तथा इन्द्र दरबार से होगा एवं शुक्रवार को कैलाशलीला, रावण अत्याचार तथा वेदवती संवाद के बाद दशरथ दरबार में रामजन्म की प्रासंगिकता का दर्शन कराया जायेगा। रामजन्म एवं सीता जन्म से उस प्राचीन परम्परा का दर्शन होगा जिसमें महापुरुष अवतार लेते हैं और उनके परिणय की क्या प्रक्रिया होती थी। भारत की सनातन परम्परा का समाज में समावेश हो इसी उद्देश्य से 10 अक्टूबर को भगवान श्रीराम विवाह की भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जायेगा।
श्रीरामलीला कमेटी अपने रंगमंच के माध्यम से समाज को भगवान राम के उस चरित्र का दर्शन करायेगी जिससे उन्हें राजा बनने के स्थान पर चौदह वर्ष का वनवास देकर लोक कल्याण के कार्यक्रमों में लगाया गया ताकि हमारी भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिले कि स्वयं कष्ट सह कर परोपकार करने वालों के चरित्र के आधार पर उनके चित्र की पूजा होती है तथा इंसान को भगवान का दर्जा प्राप्त होता है। रामलीला का दर्शन हमारे समाज को प्रेरणा देता है कि व्यक्ति कहीं भी अकेला नहीं होता, कभी असहाय नहीं होता और किसी भी कार्य को करने में अक्षम नहीं होता, इच्छाशक्ति दृढ़ एवं परोपकार की भावना हो और स्वार्थ से ऊपर उठकर किया गया व्यक्ति का प्रत्येक कार्य उसे यश, कीर्ति एवं सम्मान का पात्र बनाता है।
श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि रंगमंच के सभी कार्यक्रम रात्रि 9 बजे से 1 बजे के मध्य सम्पन्न हांेगे जबकि 19 अक्टूबर को रोड़ी बेलवाला मैदान पर गंगा तट से सत्य, परोपकार एवं सदाचार की विजय स्वरुप दशहरा पायता का भव्य आयोजन किया जायेगा जिसकी अद्भुत प्रस्तुति देशवासियों को अपने अतीत से गौरवान्वित करेगी। उन्हांेने बताया कि धर्मनगरी की इस रामलीला का दर्शन करने सम्पूर्ण भारतवर्ष के श्रद्धालु प्रतिवर्ष हरिद्वार आते हैं।
श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट तथा मुख्य दिग्दर्शक महाराज कृष्ण सेठ द्वारा सम्पूर्ण कमेटी के मतानुसार बनायी गयी विषय सूची के अनुरुप रंगमंच का शुभारम्भ नारदमोह तथा इन्द्र दरबार से होगा एवं शुक्रवार को कैलाशलीला, रावण अत्याचार तथा वेदवती संवाद के बाद दशरथ दरबार में रामजन्म की प्रासंगिकता का दर्शन कराया जायेगा। रामजन्म एवं सीता जन्म से उस प्राचीन परम्परा का दर्शन होगा जिसमें महापुरुष अवतार लेते हैं और उनके परिणय की क्या प्रक्रिया होती थी। भारत की सनातन परम्परा का समाज में समावेश हो इसी उद्देश्य से 10 अक्टूबर को भगवान श्रीराम विवाह की भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जायेगा।
श्रीरामलीला कमेटी अपने रंगमंच के माध्यम से समाज को भगवान राम के उस चरित्र का दर्शन करायेगी जिससे उन्हें राजा बनने के स्थान पर चौदह वर्ष का वनवास देकर लोक कल्याण के कार्यक्रमों में लगाया गया ताकि हमारी भावी पीढ़ी को प्रेरणा मिले कि स्वयं कष्ट सह कर परोपकार करने वालों के चरित्र के आधार पर उनके चित्र की पूजा होती है तथा इंसान को भगवान का दर्जा प्राप्त होता है। रामलीला का दर्शन हमारे समाज को प्रेरणा देता है कि व्यक्ति कहीं भी अकेला नहीं होता, कभी असहाय नहीं होता और किसी भी कार्य को करने में अक्षम नहीं होता, इच्छाशक्ति दृढ़ एवं परोपकार की भावना हो और स्वार्थ से ऊपर उठकर किया गया व्यक्ति का प्रत्येक कार्य उसे यश, कीर्ति एवं सम्मान का पात्र बनाता है।
श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि रंगमंच के सभी कार्यक्रम रात्रि 9 बजे से 1 बजे के मध्य सम्पन्न हांेगे जबकि 19 अक्टूबर को रोड़ी बेलवाला मैदान पर गंगा तट से सत्य, परोपकार एवं सदाचार की विजय स्वरुप दशहरा पायता का भव्य आयोजन किया जायेगा जिसकी अद्भुत प्रस्तुति देशवासियों को अपने अतीत से गौरवान्वित करेगी। उन्हांेने बताया कि धर्मनगरी की इस रामलीला का दर्शन करने सम्पूर्ण भारतवर्ष के श्रद्धालु प्रतिवर्ष हरिद्वार आते हैं।
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