हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से भारत में बढ़ती रक्ष संस्कृति को समाप्त करने के लिए नैमिशारण्य के अधिपति खर एवं दूषण का वध तथा सूर्पनखा की नाक काटने का रोमांचकारी मंचन किया एवं भगवान श्रीराम ने वन की भयावहता को ध्यान में रखते हुए माता सीता को अर्न्तध्यान कर उनके साये को अपने साथ रखने का निर्णय लिया।
श्रीरामलीला कमेटी ने आज सृष्टि के उस सत्य का दर्शन कराया जिसमें यह दर्शाया गया कि जब किसी स्त्री पर अत्याचार होता है तब संहार एवं सर्वनाश का योग बनता है तथा भगवान श्रीराम श्रीहरि के अवतारी थे इसलिए उनका चैन से रहना देवताओं को रास नहीं आता था, पंचवटी में कुछ ही दिन बीते कि रावण की बहन सूर्पनखा जिसके पति की रावण ने हत्या कर दी थी वह नैमिष अरणय में अपने भाई खर एवं दूषण के साथ रहती थी। सुन्दरी सूर्पनखा एक दिन वन में विहार करते हुए पंचवटी पहुंची जहां राम एवं लक्ष्मण को देखकर उसका मन डोल गया तथा बारी-बारी से दोनों वनवासी राजकुमारों के सामने उसने शादी करने का प्रस्ताव रख दिया सृष्टि के विधान में मातृशक्ति को प्रसन्न रखने की व्यवस्था दी गई है जब स्त्री किसी से अप्रसन्न हो जाती है तो उसके जीवन के कष्टकारी क्षण प्रारम्भ हो जाते हैं। सुन्दरी सूर्पनखा का भगवान श्रीराम एवं लक्ष्मण ने न केवल शादी का प्रस्ताव ठुकराया बल्कि लक्ष्मण ने उसकी नाक काट दी यहीं से राक्षसों के विनाश की लीला का शुभारम्भ हो गया। सूर्पनखा अपनी कटी नाक लेकर अपने भाई खर एवं दूषण के पास गयी तो वे भी आग बबूला हो गए और राम-लक्ष्मण से अपनी बहन के अपमान का बदला लेने दलबल के साथ पंचवटी पहुंचे जहां भगवान श्रीराम ने दोनों को जीवन के झंझावातों से मुक्ति प्रदान की।
श्रीरामलीला कमेटी के महामंत्री कृष्णमूर्ति भट्ट के संचालन तथा मुख्य दिग्दर्शक महाराजकृष्ण सेठ एवं दिग्दर्शक भगवत शर्मा ‘मुन्ना’ के निर्देशन में दिखाये जा रहे दृश्यों की भव्यता एवं प्राचीनतम स्वरुप की प्रस्तुति की सर्वत्र सराहना हो रही है तथा दिन-प्रतिदिन दर्शकों की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्र्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि सोमवार को शबरी-राम दर्शन, सुग्रीव मैत्री तथा बाली वध की लीला का मंचन किया जायेगा। श्रीरामलीला के रंगमंच से नवरात्र साधना को साकार करने के लिए मुख्य दिग्दर्शक तथा संगीत दिग्दर्शक ने संयुक्त रुप से माता की भेंटे भी प्रस्तुत की। प्रतिदिन की लीला का शुभारम्भ गणेश वंदना तथा श्रीहरि के स्मरण से तथा विश्राम श्रीहरि के नारायण स्वरुप की आरती से होता है। भगवान की आरती उतार कर विश्व कल्याण एवं समाजोत्थान की कामना करने वालों में प्रमुख है गंगाशरण मददगार, वीरेन्द्र चड्ढा, रविकान्त अग्रवाल, सुनील भसीन, रविन्द्र अग्रवाल, नरेन्द्र शर्मा, राहुल वशिष्ठ, कन्हैया खेवड़िया, रमन शर्मा, महेश गौड़, श्रीकृष्ण खन्ना, विकास सेठ, पवन शर्मा तथा सुनील वधावन।
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