हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज गंगा तट के रोडी बेलवाला मैदान पर भव्य दशहरा पर्व का आयोजन कर असत्य एवं अहंकार पर सत्य एवं परोपकार की विजय को सार्थकता प्रदान करते हुए रावण एवं मेघनाद के विशालकाय पुतलों का समारोहपूर्वक दहन किया। इससे पूर्व रोडी बेलवाला मैदान को राजसी अंदाज में युद्धभूमि के रुप में सजाया गया जहां राम और रावण अलग-अलग अपने रथों पर विराजमान होकर युद्धभूमि में उतरे।
दहशरा स्थल पर आमने-समाने दो मंचों को इस प्रकार सजाया गया जिसमें एक मंच पर रामादल की वानर सेना तो दूसरे पर राक्षसी सेना के साथ पहुंचा रावण भगवान राम के हाथों अपनी मुक्ति की कामना कर रहा था। दशहरा को विजयदशमी के रुप में जानने की औचित्य की जानकारी देेते हुए श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र चड्ढा तथा सम्पत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष गंगाशरण मददगार ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अयोध्या की बिना जनहानि एवं धनहानि किए वानर एवं भालू इत्यादि के सहारे लंका पर विजय प्राप्त की वहीं रावण ने भी भगवान श्रीहरि के अवतारी श्रीराम के हाथों अपनी मुक्ति के उद्देश्य की पूर्ति हेतु विजय प्राप्त की और उसकी मृत्यु के पूर्व ही लंका का राजा भी उसका भाई विभीषण बना। विजयदशमी उत्सव में आज सबसे बड़ा आकर्षण रावण-मेघनाद के पुतलों की विशालता एवं सजायी गयी आतिशबाजी का रहा। धर्मनगरी में यह पहला अवसर था जब आतिशबाजी का सम्पूर्ण संचालन रिमोर्ट कन्ट्रोल के सहारे किया गया।
इससे पूर्व गत रात्रि श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर कुम्भकरण-मेघनाद वध तथा सुलोचना विलाप की लीला का मंचन किया गया जिसमें कुम्भकरण को गहन निद्रा से जगाने तथा मेघनाद एवं लक्ष्मण के युद्ध को जिस प्राचीनशैली में प्रस्तुत किया उसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्रीरामलीला कमेटी ने अपने रंगमंच के माध्यम से जहां भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के तहत रामलीला के प्रत्येक राज्य की सांस्कृतिक धरोहर की छटा भी रंगमंच से बिखेरी हरिद्वार में रामलीला का यह पहला रंगमंच है जहां दृश्य बदलने में विलम्ब होने पर प्रत्येक राज्य की अलग-अलग लोक संस्कृति का उसी शैली में दर्शन कराया गया। रामलीला के सम्पूर्ण आयोजन में सफलता का श्रेय प्राप्त करने वालों में प्रमुख है सम्पत्ति कमेटी के अध्यक्ष गंगाशरण मददगार, मंत्री रविकान्त अग्रवाल, कोषाध्यक्ष तथा रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र चड्ढा, कृष्णमूर्ति भट्ट, नरेन्द्र चड्ढा, संदीप कपूर, श्रीकृष्ण खन्ना, महाराजकृष्ण सेठ, सुनील भसीन, विनय सिंघल, कन्हैया खेवड़िया, रविन्द्र अग्रवाल, अंजना चड्ढा, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, नरेन्द्र शर्मा, अनिल सुखीजा, रमन शर्मा, महेश गौड़, सुनील वधावन, मयंकमूर्ति भट्ट, विकास सेठ, राहुल वशिष्ठ, विनोेद नयन, डॉ. रमेश खन्ना, दर्पण चड्ढा, नीरज भसीन, विशालमूर्ति भट्ट, रजत चड्ढा, मनोज सहगल, वीरेन्द्र गोस्वामी, मनमोहन सहगल, हरद्वारी लाल तथा सुनील भसीन।
दहशरा स्थल पर आमने-समाने दो मंचों को इस प्रकार सजाया गया जिसमें एक मंच पर रामादल की वानर सेना तो दूसरे पर राक्षसी सेना के साथ पहुंचा रावण भगवान राम के हाथों अपनी मुक्ति की कामना कर रहा था। दशहरा को विजयदशमी के रुप में जानने की औचित्य की जानकारी देेते हुए श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र चड्ढा तथा सम्पत्ति कमेटी ट्रस्ट के अध्यक्ष गंगाशरण मददगार ने बताया कि भगवान श्रीराम ने अयोध्या की बिना जनहानि एवं धनहानि किए वानर एवं भालू इत्यादि के सहारे लंका पर विजय प्राप्त की वहीं रावण ने भी भगवान श्रीहरि के अवतारी श्रीराम के हाथों अपनी मुक्ति के उद्देश्य की पूर्ति हेतु विजय प्राप्त की और उसकी मृत्यु के पूर्व ही लंका का राजा भी उसका भाई विभीषण बना। विजयदशमी उत्सव में आज सबसे बड़ा आकर्षण रावण-मेघनाद के पुतलों की विशालता एवं सजायी गयी आतिशबाजी का रहा। धर्मनगरी में यह पहला अवसर था जब आतिशबाजी का सम्पूर्ण संचालन रिमोर्ट कन्ट्रोल के सहारे किया गया।
इससे पूर्व गत रात्रि श्रीरामलीला कमेटी के रंगमंच पर कुम्भकरण-मेघनाद वध तथा सुलोचना विलाप की लीला का मंचन किया गया जिसमें कुम्भकरण को गहन निद्रा से जगाने तथा मेघनाद एवं लक्ष्मण के युद्ध को जिस प्राचीनशैली में प्रस्तुत किया उसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। श्रीरामलीला कमेटी ने अपने रंगमंच के माध्यम से जहां भारतीय सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के तहत रामलीला के प्रत्येक राज्य की सांस्कृतिक धरोहर की छटा भी रंगमंच से बिखेरी हरिद्वार में रामलीला का यह पहला रंगमंच है जहां दृश्य बदलने में विलम्ब होने पर प्रत्येक राज्य की अलग-अलग लोक संस्कृति का उसी शैली में दर्शन कराया गया। रामलीला के सम्पूर्ण आयोजन में सफलता का श्रेय प्राप्त करने वालों में प्रमुख है सम्पत्ति कमेटी के अध्यक्ष गंगाशरण मददगार, मंत्री रविकान्त अग्रवाल, कोषाध्यक्ष तथा रामलीला कमेटी के अध्यक्ष वीरेन्द्र चड्ढा, कृष्णमूर्ति भट्ट, नरेन्द्र चड्ढा, संदीप कपूर, श्रीकृष्ण खन्ना, महाराजकृष्ण सेठ, सुनील भसीन, विनय सिंघल, कन्हैया खेवड़िया, रविन्द्र अग्रवाल, अंजना चड्ढा, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, नरेन्द्र शर्मा, अनिल सुखीजा, रमन शर्मा, महेश गौड़, सुनील वधावन, मयंकमूर्ति भट्ट, विकास सेठ, राहुल वशिष्ठ, विनोेद नयन, डॉ. रमेश खन्ना, दर्पण चड्ढा, नीरज भसीन, विशालमूर्ति भट्ट, रजत चड्ढा, मनोज सहगल, वीरेन्द्र गोस्वामी, मनमोहन सहगल, हरद्वारी लाल तथा सुनील भसीन।
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