उत्तरप्रदेश में स्थित उत्कृष्ठ तकनीकी संस्थानों में से एक हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों का सम्मेलन २४ -२५ नवम्बर २०१८ को होने जा रहा है। देश विदेश में अपनी तकनीकि सेवाएं दे रहे हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों के बड़ी संख्या में इस सम्मेलन में सम्मिलित होने की संभावना है। इसी सिलसिले में जब इस समाचार पत्र "गंगा का सन्देश" के मुख्य संपादक श्री राम नरेश को यह ज्ञात हुआ कि हरिद्वार स्थित पूर्वी गंगा नहर के अधिशासी अभियंता श्री विजय वीर सिंह यादव ने भी उसी संस्थान से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की है तो श्री राम नरेश ने श्री विजय वीर सिंह यादव जी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर पर केंद्रित भेंट वार्ता की। अधिशासी अभियंता श्री विजय वीर सिंह यादव ने बताया कि सन १९२० में इस की स्थापना गवर्नमेंट रिसर्च इंस्टिट्यूट के रूप में हुई जिसका सन १९२१ में नाम बदल कर गवर्नमेंट टेक्नीकल इंस्टिट्यूट रख दिया गया। बाद में वर्ष १९२६ को इसका नाम हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट रख दिया गया। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष २०१६ में इसके विश्व विद्यालय बनने तक इसका नाम हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ही रहा। श्री विजय वीर सिंह यादव ने बताया कि विश्व का शायद ही कोई देश ऐसा होगा जहां इस संस्थान का पढ़ा छात्र अपनी सेवाएं न दे रहा हो। इसी प्रकार अपने देश के अधिकांश राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की सेवाओं में बड़े बड़े पदों पर इस संस्थान के पढ़े हुए छात्र विराजमान हैं। श्री विजय वीर ने बताया कि विगत पांच वर्षों में तीन बार तो उनके विभाग में ही शीर्ष पद प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) के पद को हरकोर्ट बटलर के पूर्व छात्र सुशोभित कर चुके हैं। उनसे पूछे जाने पर उन्होंने अवगत कराया कि यदि कोई राजकीय बाध्यता न रही तो वो भी २४ -२५ नवम्बर २०१८ को होने जा रहे हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों के उस सम्मलेन में शामिल होंगे।
उत्तरप्रदेश में स्थित उत्कृष्ठ तकनीकी संस्थानों में से एक हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों का सम्मेलन २४ -२५ नवम्बर २०१८ को होने जा रहा है। देश विदेश में अपनी तकनीकि सेवाएं दे रहे हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों के बड़ी संख्या में इस सम्मेलन में सम्मिलित होने की संभावना है। इसी सिलसिले में जब इस समाचार पत्र "गंगा का सन्देश" के मुख्य संपादक श्री राम नरेश को यह ज्ञात हुआ कि हरिद्वार स्थित पूर्वी गंगा नहर के अधिशासी अभियंता श्री विजय वीर सिंह यादव ने भी उसी संस्थान से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक की डिग्री हासिल की है तो श्री राम नरेश ने श्री विजय वीर सिंह यादव जी उनके सरकारी आवास पर मुलाकात कर हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर पर केंद्रित भेंट वार्ता की। अधिशासी अभियंता श्री विजय वीर सिंह यादव ने बताया कि सन १९२० में इस की स्थापना गवर्नमेंट रिसर्च इंस्टिट्यूट के रूप में हुई जिसका सन १९२१ में नाम बदल कर गवर्नमेंट टेक्नीकल इंस्टिट्यूट रख दिया गया। बाद में वर्ष १९२६ को इसका नाम हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट रख दिया गया। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष २०१६ में इसके विश्व विद्यालय बनने तक इसका नाम हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ही रहा। श्री विजय वीर सिंह यादव ने बताया कि विश्व का शायद ही कोई देश ऐसा होगा जहां इस संस्थान का पढ़ा छात्र अपनी सेवाएं न दे रहा हो। इसी प्रकार अपने देश के अधिकांश राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की सेवाओं में बड़े बड़े पदों पर इस संस्थान के पढ़े हुए छात्र विराजमान हैं। श्री विजय वीर ने बताया कि विगत पांच वर्षों में तीन बार तो उनके विभाग में ही शीर्ष पद प्रमुख अभियंता (Engineer-in-Chief) के पद को हरकोर्ट बटलर के पूर्व छात्र सुशोभित कर चुके हैं। उनसे पूछे जाने पर उन्होंने अवगत कराया कि यदि कोई राजकीय बाध्यता न रही तो वो भी २४ -२५ नवम्बर २०१८ को होने जा रहे हरकोर्ट बटलर तकनीकि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व छात्रों के उस सम्मलेन में शामिल होंगे।
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