हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से सृष्टि की व्यवस्था संचालन का सबसे महत्वपूर्ण लेकिन हृदय विदारक दृश्य प्रस्तुत कर दर्शकों के अर्न्तमन को भावुकता से भर दिया। अयोध्या के राजा दशरथ ने अपनी वृद्धावस्था को देखते हुए जैसे ही भगवान राम को राजपाट देने की घोषणा की तो देवलोक में हाहाकार मच गया और राम को राजगद्दी के स्थान पर चौदह वर्ष का वनवास हो गया।
श्रीरामलीला कमेटी ने दर्शाया कि श्रीराम किसी राजा के पुत्र न होकर श्रीहरि विष्णु के अवतारी थे जो धराधाम से अन्याय, अराजकता एवं अहंकार का नाश करने के लिए अवतरित हुए थे यदि वे राजा बन जाते तो उनके अवतार का हेतु अधूरा रह जाता। देवताओं ने मां सरस्वती की वन्दना कर उनको मंथरा की जिव्या पर बैठाया जिसने केकई को राजा दशरथ से अपने दोनों वरदान मांग लिए जिसमें भरत को राजगद्दी और राम को वनवास हुआ। श्रीरामलीला कमेटी ने आज भारतीय संस्कृति के उस गौरवमयी अतीत का दर्शन कराया जिसमें राजा दशरथ को अपने राजधर्म एवं कुल की मर्यादा बनाये रखने के लिए अपने प्रिय पुत्र राम को चौदह वर्ष के लिए वनवास में जाने का आदेश देना पड़ा लेकिन रघुकुल की रीति-नीति पर आंच नहीं आने दी जो वर्तमान युग के लिए अनुकरणीय होने का संकेत दे रही है। श्रीरामलीला कमेटी के पात्रों की भावुकता एवं अभिनय शैली जहां दर्शकों के आर्कषण का केन्द्र रही वहीं मंच सज्जा में राजा दशरथ का दरबार, केकई का कोप भवन तथा राजा इन्द्र का दरबार अपनी भव्यता एवं प्राचीनता को गौरवान्वित कर रहा था।
श्रीरामलीला कमेटी के प्रेस प्रवक्ता विनय सिंघल ने बताया कि शनिवार को रंगमंच पर पंचवटी, सुन्दरी सूर्पनखा तथा खरदूषण वध की लीला का मंचन किया जायेगा। तीर्थनगरी में बड़ी रामलीला का गौरव प्राप्त करने वाली इस लीला की विशेषता है कि आयोजक मण्डल इसकी व्यवस्था का संचालन अनुशासन एवं विधानपूर्वक करते हैं जिनमें प्रमुख हैं गंगाशरण मददगार, कृष्णमूर्ति भट्ट, महाराज कृष्ण सेठ, रविकान्त अग्रवाल, भगवत शर्मा ‘मुन्ना’, सुनील भसीन, विनय सिंघल, डॉ. संदीप कपूर, कन्हैया खेवड़िया, राहुल वशिष्ठ, रविन्द्र अग्रवाल, पवन शर्मा, सुनील वधावन, नरेन्द्र शर्मा, अनिल सुखीजा तथा विकास सेठ सहित सम्पूर्ण कार्यकारिणी का योगदान ही दर्शकों की प्रशंसा का पात्र बनता है।
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