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संत संगठन तथा विलक्षण प्रतिभा के धनी थे जगदगुरु हंसदेवाचार्य जी महाराज : श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह


हरिद्वार, 11 फरव
री। श्रीमज्जगदगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष में श्रीजगन्नाथ धाम ट्रस्ट के तत्वावधान में गंगातट के पंतद्वीप मैदान में आज विराट श्रद्धाजंलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धाजंलि समारोह में भानुपुरा पीठ के शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानन्द तीर्थ प्रेरणापीठाधीश्वर स्वामी दुर्गादास एवं श्रीनिर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह के सानिध्य में देश के कोने-कोने से आये हजारों संत-महापुरुषों एवं उनके अनुयायियों ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनके बताये मार्ग पर चलने का संकल्प लिया तथा उनके दोनों शिष्य अरुणदास एवं लोकेशदास के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
श्रीरामजन्म भूमि आन्दोलन के प्रमुख प्रणेता के रुप में माने जाने वाले साकेतवासी जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज की सांगठनिक क्षमता तथा असंभव को संभव बनाने वाली उनकी शैली को सभी संतों ने नमन करते हुए संत समाज के लिए हुई अपूर्णनीय क्षति बताया। भानुपुरा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने उनके संत जीवन को धर्म एवं संस्कृति के लिए महान प्रेरणादायी बताते हुए उनके शिष्यों को दान से अर्जित धन को धर्म में प्रयोग करने की प्रेरणा दी। श्रद्धाजंलि सभा को अध्यक्षीय पद से सम्बोधित करते हुए निर्मल पीठाधीश्वर श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि जगद्गुरु के गुणों का वर्णन नहीं किया जा सकता और स्वामी हंसदेवाचार्य का नाम राम मंदिर निर्माण से जुड़े महापुरुषों में प्रथम पायदान पर रहेगा। पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने जगद्गुरु को संत संगठन का विशेषज्ञ बताते हुए कहा कि उन्होंने गुरुओं की श्रद्धाजंलि सभा भारत के तीर्थों पर मनाकर तीर्थ परम्परा का संवर्द्धन किया। म.मं. स्वामी हरिचेतानन्द ने विलक्षण प्रतिभा के धनी बताते हुए कहा कि वे कभी सत्ता और शासन के सामने झुके नहीं। अयोध्या से पधारे संत मं. गौरीशंकर दास ने कुम्भ में स्वामी हंसदेवाचार्य द्वार बनाने की मांग की। श्रद्धाजंलि सभा को वैष्णव मण्डल अध्यक्ष महंत विष्णुदास, स्वामी ऋषिश्वरानंद, राजेन्द्र सिंह पंकज, बलराम दास हठयोगी, म. दुर्गादास, स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी प्रेमानन्द, म.मं. अनुभूतानन्द, म.मं. प्रबोधानन्द, म.मं. स्वामी अर्जुन पुरी, म. जनार्दन हरि, म. शिवशंकर गिरि, स्वामी रविदेव शास्त्री, म. ईश्वरदास, म.मं. रिजकदास, बाबा राधेमोहन, म. लालता गिरि, स्वामी चिदविलासानन्द, म. जगदीशानन्द, म. मंगलदास के साथ ही पवन आहूजा, सोमनाथ, गोवर्धनदास, गोविन्ददास चावला, शांति भाई मुम्बई के साथ ही दिल्ली, पानीपत, डुजाना, गुजरात, मुम्बई, राजस्थान, उत्तर प्रदेश सहित सम्पूर्ण भारत के संतों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम का संचालन स्वामी हरिहरानन्द ने किया अंत में कार्यक्रम के आयोजक म. अरुणदास एवं म. लोकेशदास ने सभी संत, महापुरुषों, ट्रस्टियों तथा भक्तों का आभार व्यक्त किया। 

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