हरिद्वार। अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश यादव ने कहा है कि राजनीति और जादू दो ऐसी विद्यायें हैं जो हर किसी के समझ में नहीं आती हैं जिस प्रकार जादू का खेल वास्तविक नहीं होता उसमें जो चीज दिखायी जाती वह वास्तविकता नहीं होती है उसी प्रकार असली राजनीति वही होती है जिसे कोई समझ न पाये और इसी को वास्तविक राजनीति कहते हैं जिससे राजनेता देश और जनता दोनों पर राज करने की नीति बनाते है और इस वर्ग में अब तक तीन नेताओं के नामों को सम्मिलित किया गया है।
आम जनता के समझ में न आने वाली नीति का शुभारम्भ किया था इन्दिरा गांधी ने और उस नीति को और संशोधित करने के साथ उसका अनुसरण किया नरेन्द्र मोदी एवं मुलायम सिंह यादव ने। इन्दिरा गांधी तो आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी नीतियां किसी के समझ में नहीं आयीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी किस नीति के तहत सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे और किन नीतियों से वे देश चला रहे तथा किस नीति के तहत दोबारा सत्ता में आयेंगे इसकी जानकारी किसी को नहीं है। देश तथा दुनिया के नेता वर्तमान में तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं लेकिन 2019 में क्या होगा इसका भान किसी को नहीं है मोदी की नीति को न तो भाजपा वाले समझ पा रहे और न ही विपक्ष, जनता तो बेचारी है उसके न चाहते हुए भी उसका वोट ले लिया जाता है।
राजनीति के क्षेत्र में एक कहावत है कि जिस नेता की नीति और नियति यदि दूसरे के समझ में आ जाये तो वह नेता नहीं होता है और मुलायम सिंह यादव का यही गुण उनको नेताजी के नाम का संबोधन प्रदान कर रहा है। उनके अन्दर राष्ट्रप्रेम और अपनत्व की जो भावना है वह भारत के किसी राजनेता में नहीं है। उन्हांेने अपने गांव, अपने क्षेत्र और अपने परिवार को इतने शीर्ष पर पहुंचाया जो पूरे विश्व में एक मिसाल है और सम्पूर्ण भूमण्डल पर सैफई गांव से विकसित कोई गांव नहीं है और उनके परिवार से बड़ा कोई राजनैतिक परिवार नहीं है। उत्तराखण्ड जैसे प्रदेश में पांच लोकसभा सांसद हैं जबकि उनके परिवार में ही पांच सांसद हैं। उम्र के अन्तिम पड़ाव की ओर बढ़ने के कारण वे अपने राजनैतिक उत्तराधिकारियों को जांच परख रहे हैं इसीलिए कभी बेटे की तरफ तो कभी भाई की तरफ हो जाते हैं वे देखना चाहते है कि किसमें कितना दमखम है इसीलिए वे दोनों के साथ हैं।
कुछ लोग कयास लगा रहे हैं कि यादव-यादव का दुश्मन होता है और एक यादव को दूसरे यादव से लड़वाकर ही उस पर विजय पायी जा सकती है तो कोई कहता है कि यादव अपने वंश और बिरादरी का दुश्मन होता है जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वधाम गमन से पूर्व सभी यादवों को निपटा दिया था उसी प्रकार मुलायम सिंह यादव अपनी मेहनत से बनायी हुई पार्टी को इस दुनिया से जाने से पूर्व निपटा रहे हैं। हर किसी के देखने का अपना-अपना नजरिया होता है और सभी अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
मुलायम सिंह यादव भारत के ऐसे नेता है जिन्होंने जमीन से जुड़कर देश और समाज में अपना अलग स्थान बनाया। वे न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि समाजवाद के भाग्य विधाता हैं उनके परिवार में क्या चल रहा है यह हर किसी की समझ में नहीं आ सकता। राजनीति में न कोई किसी दुश्मन होता है न दोस्त और जो सबसे नजदीक है वही कब दुश्मन बन जाये इसका ज्ञान जिसको हो जाता है वही राजनेता की श्रेणी में आता है। मुलायम सिंह यादव के विषय में समझने से पूर्व उनके अतीत पर निगाह डालनी होगी और भविष्य में क्या होने वाला शायद उसका कुछ ज्ञान हो सके फिलहाल जब तक वे इस धराधाम पर है न तो सपा का बाल बांका होगा न ही उनका परिवार बिखरेगा। जहां तक अपना या पराया बनाने की बात है तो उन्होंने कांग्रेस का भी बनाया, भाजपा का भी बना रहे है उन्हांेने मुसलमानों का भी बनाया और मायावती का भी बनाया उन्होंने अपनी बिरादरी को भी नहीं छोड़ा और उसका भी खूब बनाया और आज भी बना रहे है क्योंकि दूसरे को भ्रम में जीवित रखने का नाम ही राजनीति है, नेता की जय हो।
आम जनता के समझ में न आने वाली नीति का शुभारम्भ किया था इन्दिरा गांधी ने और उस नीति को और संशोधित करने के साथ उसका अनुसरण किया नरेन्द्र मोदी एवं मुलायम सिंह यादव ने। इन्दिरा गांधी तो आज इस दुनिया में नहीं है लेकिन उनकी नीतियां किसी के समझ में नहीं आयीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी किस नीति के तहत सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे और किन नीतियों से वे देश चला रहे तथा किस नीति के तहत दोबारा सत्ता में आयेंगे इसकी जानकारी किसी को नहीं है। देश तथा दुनिया के नेता वर्तमान में तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं लेकिन 2019 में क्या होगा इसका भान किसी को नहीं है मोदी की नीति को न तो भाजपा वाले समझ पा रहे और न ही विपक्ष, जनता तो बेचारी है उसके न चाहते हुए भी उसका वोट ले लिया जाता है।
राजनीति के क्षेत्र में एक कहावत है कि जिस नेता की नीति और नियति यदि दूसरे के समझ में आ जाये तो वह नेता नहीं होता है और मुलायम सिंह यादव का यही गुण उनको नेताजी के नाम का संबोधन प्रदान कर रहा है। उनके अन्दर राष्ट्रप्रेम और अपनत्व की जो भावना है वह भारत के किसी राजनेता में नहीं है। उन्हांेने अपने गांव, अपने क्षेत्र और अपने परिवार को इतने शीर्ष पर पहुंचाया जो पूरे विश्व में एक मिसाल है और सम्पूर्ण भूमण्डल पर सैफई गांव से विकसित कोई गांव नहीं है और उनके परिवार से बड़ा कोई राजनैतिक परिवार नहीं है। उत्तराखण्ड जैसे प्रदेश में पांच लोकसभा सांसद हैं जबकि उनके परिवार में ही पांच सांसद हैं। उम्र के अन्तिम पड़ाव की ओर बढ़ने के कारण वे अपने राजनैतिक उत्तराधिकारियों को जांच परख रहे हैं इसीलिए कभी बेटे की तरफ तो कभी भाई की तरफ हो जाते हैं वे देखना चाहते है कि किसमें कितना दमखम है इसीलिए वे दोनों के साथ हैं।
कुछ लोग कयास लगा रहे हैं कि यादव-यादव का दुश्मन होता है और एक यादव को दूसरे यादव से लड़वाकर ही उस पर विजय पायी जा सकती है तो कोई कहता है कि यादव अपने वंश और बिरादरी का दुश्मन होता है जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने स्वधाम गमन से पूर्व सभी यादवों को निपटा दिया था उसी प्रकार मुलायम सिंह यादव अपनी मेहनत से बनायी हुई पार्टी को इस दुनिया से जाने से पूर्व निपटा रहे हैं। हर किसी के देखने का अपना-अपना नजरिया होता है और सभी अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
मुलायम सिंह यादव भारत के ऐसे नेता है जिन्होंने जमीन से जुड़कर देश और समाज में अपना अलग स्थान बनाया। वे न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि समाजवाद के भाग्य विधाता हैं उनके परिवार में क्या चल रहा है यह हर किसी की समझ में नहीं आ सकता। राजनीति में न कोई किसी दुश्मन होता है न दोस्त और जो सबसे नजदीक है वही कब दुश्मन बन जाये इसका ज्ञान जिसको हो जाता है वही राजनेता की श्रेणी में आता है। मुलायम सिंह यादव के विषय में समझने से पूर्व उनके अतीत पर निगाह डालनी होगी और भविष्य में क्या होने वाला शायद उसका कुछ ज्ञान हो सके फिलहाल जब तक वे इस धराधाम पर है न तो सपा का बाल बांका होगा न ही उनका परिवार बिखरेगा। जहां तक अपना या पराया बनाने की बात है तो उन्होंने कांग्रेस का भी बनाया, भाजपा का भी बना रहे है उन्हांेने मुसलमानों का भी बनाया और मायावती का भी बनाया उन्होंने अपनी बिरादरी को भी नहीं छोड़ा और उसका भी खूब बनाया और आज भी बना रहे है क्योंकि दूसरे को भ्रम में जीवित रखने का नाम ही राजनीति है, नेता की जय हो।
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