हरिद्वार। श्रीरामलीला कमेटी रजि. ने आज अपने रंगमंच से सीता स्वयंवर एवं लक्ष्मण परशुराम संवाद जैसे बहुप्रतीक्षित दृश्य की प्रस्तुति करते हुए समाज को प्रेरणा दी कि गुरु की कृपा हो तो दुर्लभ कार्य को भी सुलभ बनाया जा सका है और भाषा की नम्रता महाक्रोधी और बेलगाम व्यक्ति पर भी आसानी से विजय प्राप्त कर लेती है।
लक्ष्मण-परशुराम संवाद श्रीरामलीला कमेटी के सबसे उत्तम दृश्यों में से एक है जिसकी प्रस्तुति का 40 वर्षों से अभिनय करने वाले होटल व्यवसायी तथा पत्रकार डॉ. रमेश खन्ना द्वारा दी जाती है। परशुराम शिवभक्त तथा क्षत्रियों के विरोधी थे और राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर में शिव धनुष को तोड़ने का लक्ष्य रखा था जिसको अन्य राजाओं की असफलता के बाद भगवान राम ने तोड़कर सीता का वरण किया। परशुराम को यह ज्ञान तो था कि उस शिव धनुष को भगवान श्रीहरि के अवतारी के अलावा कोई नहीं उठा सकता लेकिन उन्हें यह ज्ञान नहीं था कि रामावतार हो चुका है। उनके क्रोध का जवाब जहां लक्ष्मण ने क्षत्रित्व भाव में दिया वहीं भगवान राम की नम्रता ने उनको अपना क्रोध भुलाकर राम से माफी मांगने पर मजबूर कर दिया। श्रीरामलीला कमेटी ने आज अपने संगीत दिग्गदर्शक विनोद नयन के माध्यम से जनक दरबार का वह दृश्य प्रस्तुत किया जैसा त्रेता युग में राज दरबारों की व्यवस्था बनाने में किया जाता था। इससे पूर्व रावण-वाणासुर संवाद में भी वाणासुर ने रावण को नीतिगत विचारधारा पर चलने के लिए आगाह किया फिर भी रावण सीता स्वयंवर में गया और एक आकाशवाणी सुनकर भले ही वापस आ गया लेकिन चलते-चलते उसने घोषणा कर दी कि दोबारा जब भारत आऊंगा तो सीता को लंका दिखाऊंगा। श्रीरामलीला कमेटी ने रंगमंच पर सम्पन्न हुए सीता स्वयंवर के पश्चात आज श्रीरामलीला भवन में भगवान श्रीराम के विवाह की भव्य शोभायात्रा का आयोजन किया जिसमें दिल्ली, सहारनपुर एवं धर्मनगरी के बड़े बैण्डबाजों ने धार्मिक स्वर लहरी से शहर में मांगलिक कार्यों के शुभारम्भ का श्रीगणेश किया। राम विवाह की शोभायात्रा श्रीरामलीला भवन से प्रारम्भ होकर मोतीबाजार, बड़ा बाजार, अपर रोड होते हुए पुनः रामलीला भवन में सम्पन्न हुई शोभायात्रा का प्रारम्भ से अन्त तक एक सौ से भी अधिक स्थानों पर भव्य स्वागत हुआ जबकि सम्पूर्ण शोभायात्रा मार्ग में पुष्पवर्षा से अभिनन्दन किया गया। श्रीराम बारात की शोभायात्रा को दिव्यता एवं भव्यता प्रदान करने वालों में प्रमुख थे गंगाशरण मददगार, कृष्णमूर्ति भट्ट, रविकान्त अग्रवाल, महाराजकृष्ण सेठ, भगवत शर्मा ‘मुन्ना, सुनील भसीन, रविन्द्र अग्रवाल, विनय सिंघल, डॉ. संदीप कपूर, कन्हैया खेवड़िया, नरेन्द्र शर्मा, सुनील वधावन, राहुल वशिष्ठ, रमन शर्मा, पवन शर्मा, अनिल सुखीजा, विकास सेठ तथा मयंकमूर्ति भट्ट सहित सभी पदाधिकारी एवं सदस्यों ने शोभायात्रा के संचालन में विशेष योगदान दिया।
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